Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 36

महिषासुरवध

सा च तान् प्रहितांस्तेन चूर्णयन्ती शरोत्करैः । उवाच तं मदोद्धूतमुखरागाकुलाक्षरम् ॥ ३६ ॥

sā cha tān prahitāṁstena chūrṇayantī śharotkaraiḥ uvācha taṁ madoddhūtamukharāgākulākṣharam

हिंदी अर्थ

उसके फेंके पर्वतों को बाणों की बौछार से चूर्ण करती हुई वे उससे बोलीं, उनका मुख मधु के मद से लाल था और वाणी लड़खड़ा रही थी।

भावार्थ

ब्रह्मांडीय युद्ध के बीच एक उल्लेखनीय मानवीय विवरण। देवी कोई दूर का अमूर्त तत्व नहीं, बल्कि सजीव रूप से जीवंत हैं।