Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 21

महिषासुरवध

एवं संक्षीयमाणे तु स्वसैन्ये महिषासुरः । माहिषेण स्वरूपेण त्रासयामास तान् गणान् ॥ २१ ॥

evaṁ saṁkṣhīyamāṇe tu svasainye mahiṣhāsuraḥ māhiṣheṇa svarūpeṇa trāsayāmāsa tān gaṇān

हिंदी अर्थ

इस प्रकार अपनी सेना का संहार होता देख महिषासुर ने भैंसे का रूप धारण करके देवी के गणों को भयभीत कर दिया।

भावार्थ

महिष अब अपने मूल रूप, भैंसे, में लड़ता है। उसके नाम का अर्थ ही "भैंसा" है, और वह पाशविक, हठी शक्ति का प्रतीक है।