Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 59

महिषासुरसैन्यवध

केचिन्निपतिता भूमौ भिन्नाः शूलेन वक्षसि । निरन्तराः शरौघेण कृताः केचिद्रणाजिरे ॥ ५९ ॥

kechinnipatitā bhūmau bhinnāḥ śhūlena vakṣhasi nirantarāḥ śharaugheṇa kṛitāḥ kechidraṇājire

हिंदी अर्थ

कुछ त्रिशूल से छाती फटने पर धरती पर गिर पड़े; और युद्धभूमि में कुछ बाणों की बौछार से छलनी हो गए।

भावार्थ

वर्णन एक आयुध से दूसरे पर जाता है, हर प्रकार के युद्ध पर उनके अधिकार को दिखाते हुए।