केचिन्निपतिता भूमौ भिन्नाः शूलेन वक्षसि । निरन्तराः शरौघेण कृताः केचिद्रणाजिरे ॥ ५९ ॥
kechinnipatitā bhūmau bhinnāḥ śhūlena vakṣhasi nirantarāḥ śharaugheṇa kṛitāḥ kechidraṇājire
हिंदी अर्थ
कुछ त्रिशूल से छाती फटने पर धरती पर गिर पड़े; और युद्धभूमि में कुछ बाणों की बौछार से छलनी हो गए।
भावार्थ
वर्णन एक आयुध से दूसरे पर जाता है, हर प्रकार के युद्ध पर उनके अधिकार को दिखाते हुए।
