Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 58

महिषासुरसैन्यवध

विपोथिता निपातेन गदया भुवि शेरते । वेमुश्च केचिद्रुधिरं मुसलेन भृशं हताः ॥ ५८ ॥

vipothitā nipātena gadayā bhuvi śherate vemuśhcha kechidrudhiraṁ musalena bhṛiśhaṁ hatāḥ

हिंदी अर्थ

कुछ गदा की चोट से कुचलकर धरती पर पड़े रहे, और कुछ मूसल की मार से बुरी तरह घायल होकर रक्त वमन करने लगे।

भावार्थ

सप्तशती युद्ध की हिंसा से नहीं कतराती। यह उन शक्तियों का विनाश है जो संसार को पीड़ित करती हैं।