सम्मानिता ननादोच्चैः साट्टहासं मुहुर्मुहुः । तस्या नादेन घोरेण कृत्स्नमापूरितं नभः ॥ ३२ ॥
sammānitā nanādochchaiḥ sāṭṭahāsaṁ muhurmuhuḥ tasyā nādena ghoreṇa kṛitsnamāpūritaṁ nabhaḥ
हिंदी अर्थ
इस प्रकार सम्मानित होकर देवी ने बार-बार अट्टहास के साथ ऊँचे स्वर में गर्जना की, और उनके भयंकर नाद से सारा आकाश भर गया।
भावार्थ
उनका पहला कार्य अट्टहास की गर्जना है, भय का युद्धघोष नहीं। यह परम आत्मविश्वास की घोषणा है।
