Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 8

फलस्तुति

उपसर्गानशेषांस्तु महामारीसमुद्भवान् । तथा त्रिविधमुत्पातं माहात्म्यं शमयेन्मम ॥ ८ ॥

upasargānaśheṣhāṁstu mahāmārīsamudbhavān tathā trividhamutpātaṁ māhātmyaṁ śhamayenmama

हिंदी अर्थ

मेरा माहात्म्य महामारी से उत्पन्न सब उपद्रवों को और आध्यात्मिक आदि तीनों प्रकार के उत्पातों को शांत करने वाला है।

भावार्थ

गीता प्रेस तीन प्रकार के उत्पातों को आध्यात्मिक आदि बताता है, अर्थात् परम्परागत तीन ताप: आध्यात्मिक (अपने भीतर से), आधिभौतिक (दूसरे प्राणियों से) और आधिदैविक (दैवी शक्तियों से)।