Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 7

फलस्तुति

तस्मान्ममैतन्माहात्म्यं पठितव्यं समाहितैः । श्रोतव्यं च सदा भक्त्या परं स्वस्त्ययनं हि तत् ॥ ७ ॥

tasmānmamaitanmāhātmyaṁ paṭhitavyaṁ samāhitaiḥ śhrotavyaṁ cha sadā bhaktyā paraṁ svastyayanaṁ hi tat

हिंदी अर्थ

इसलिए एकाग्रचित्त होकर भक्तिपूर्वक मेरे इस माहात्म्य को सदा पढ़ना और सुनना चाहिए। यह परम कल्याणकारक है।

भावार्थ

"स्वस्त्ययन", कल्याण का साधन: यह ग्रंथ स्वयं एक आशीर्वाद है।