Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 29

फलस्तुति

स्मरन्ममैतच्चरितं नरो मुच्येत सङ्कटात् । मम प्रभावात्सिंहाद्या दस्यवो वैरिणस्तथा ॥ २९ ॥

smaranmamaitachcharitaṁ naro muchyeta saṅkaṭāt mama prabhāvātsiṁhādyā dasyavo vairiṇastathā

हिंदी अर्थ

जो मेरे इस चरित्र का स्मरण करता है, वह मनुष्य संकट से मुक्त हो जाता है। मेरे प्रभाव से सिंह आदि हिंसक जंतु, लुटेरे और शत्रु

भावार्थ

"स्मरन्", स्मरण करता हुआ: संकट में 700 श्लोक पढ़ना सम्भव नहीं; कथा का स्मरण ही पर्याप्त है।