Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 26

फलस्तुति

दस्युभिर्वा वृतः शून्ये गृहीतो वापि शत्रुभिः । सिंहव्याघ्रानुयातो वा वने वा वनहस्तिभिः ॥ २६ ॥

dasyubhirvā vṛitaḥ śhūnye gṛihīto vāpi śhatrubhiḥ siṁhavyāghrānuyāto vā vane vā vanahastibhiḥ

हिंदी अर्थ

निर्जन स्थान में लुटेरों से घिर जाने पर, या शत्रुओं द्वारा पकड़े जाने पर, अथवा जंगल में सिंह, बाघ या जंगली हाथियों के पीछा करने पर,

भावार्थ

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