Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 25

फलस्तुति

ब्रह्मणा च कृतास्तास्तु प्रयच्छन्ति शुभां मतिम् । अरण्ये प्रान्तरे वापि दावाग्निपरिवारितः ॥ २५ ॥

brahmaṇā cha kṛitāstāstu prayachchhanti śhubhāṁ matim araṇye prāntare vāpi dāvāgniparivāritaḥ

हिंदी अर्थ

और ब्रह्मा जी ने जो स्तुतियाँ की हैं, वे सब कल्याणमयी बुद्धि देती हैं। वन में, सूने मार्ग में अथवा दावानल से घिर जाने पर,

भावार्थ

"शुभां मतिम्", कल्याणमयी बुद्धि: स्तुतियों का सबसे बड़ा फल सही समझ है। फिर संकटों की एक लंबी सूची शुरू होती है (25–29)।