Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 16

फलस्तुति

शान्तिकर्मणि सर्वत्र तथा दुःस्वप्नदर्शने । ग्रहपीडासु चोग्रासु माहात्म्यं शृणुयान्मम ॥ १६ ॥

śhāntikarmaṇi sarvatra tathā duḥsvapnadarśhane grahapīḍāsu chogrāsu māhātmyaṁ śhṛiṇuyānmama

हिंदी अर्थ

सब शान्ति-कर्मों में, बुरे स्वप्न दिखने पर और ग्रहों से उत्पन्न भयंकर पीड़ा में मेरा माहात्म्य सुनना चाहिए।

भावार्थ

शान्ति-कर्म और ग्रह-दोष में सप्तशती के प्रयोग का यही आधार है।