Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 17

फलस्तुति

उपसर्गाः शमं यान्ति ग्रहपीडाश्च दारुणाः । दुःस्वप्नं च नृभिर्दृष्टं सुस्वप्नमुपजायते ॥ १७ ॥

upasargāḥ śhamaṁ yānti grahapīḍāśhcha dāruṇāḥ duḥsvapnaṁ cha nṛibhirdṛiṣhṭaṁ susvapnamupajāyate

हिंदी अर्थ

इससे सब विघ्न और भयंकर ग्रह-पीड़ाएँ शांत हो जाती हैं, और मनुष्यों का देखा हुआ दुःस्वप्न शुभ स्वप्न में बदल जाता है।

भावार्थ

अशुभ संकेत केवल मिटता ही नहीं, शुभ में बदल जाता है।