Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 14

फलस्तुति

श्रुत्वा ममैतन्माहात्म्यं तथा चोत्पत्तयः शुभाः । पराक्रमं च युद्धेषु जायते निर्भयः पुमान् ॥ १४ ॥

śhrutvā mamaitanmāhātmyaṁ tathā chotpattayaḥ śhubhāḥ parākramaṁ cha yuddheṣhu jāyate nirbhayaḥ pumān

हिंदी अर्थ

मेरे इस माहात्म्य, मेरे प्रादुर्भाव की सुंदर कथाओं और युद्ध में मेरे पराक्रम को सुनने से मनुष्य निर्भय हो जाता है।

भावार्थ

युद्धों की कथाएँ साहस देने के लिए हैं।