Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 55

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

तदा तदावतीर्याहं करिष्याम्यरिसंक्षयम् ॥ ५५ ॥

tadā tadāvatīryāhaṁ kariṣhyāmyarisaṁkṣhayam

हिंदी अर्थ

तब-तब अवतार लेकर मैं शत्रुओं का संहार करूँगी।"

भावार्थ

"यदा यदा ... तदा तदा" (जब-जब ... तब-तब): वही वचन जो भगवद्गीता 4.7–8 में श्रीकृष्ण देते हैं, यहाँ देवी के मुख से। एक अर्धश्लोक से अध्याय समाप्त होता है।