Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 54

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

भ्रामरीति च मां लोकास्तदा स्तोष्यन्ति सर्वतः । इत्थं यदा यदा बाधा दानवोत्था भविष्यति ॥ ५४ ॥

bhrāmarīti cha māṁ lokāstadā stoṣhyanti sarvataḥ itthaṁ yadā yadā bādhā dānavotthā bhaviṣhyati

हिंदी अर्थ

तब सब लोग चारों ओर "भ्रामरी" नाम से मेरी स्तुति करेंगे। इस प्रकार जब-जब दानवों से बाधा उपस्थित होगी,

भावार्थ

"भ्रामरी", भ्रमरों वाली देवी। यहाँ से अंतिम वचन शुरू होता है।