Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 51

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

रक्षांसि भक्षयिष्यामि मुनीनां त्राणकारणात् । तदा मां मुनयः सर्वे स्तोष्यन्त्यानम्रमूर्तयः ॥ ५१ ॥

rakṣhāṁsi bhakṣhayiṣhyāmi munīnāṁ trāṇakāraṇāt tadā māṁ munayaḥ sarve stoṣhyantyānamramūrtayaḥ

हिंदी अर्थ

मुनियों की रक्षा के लिए राक्षसों का भक्षण करूँगी, तब सब मुनि भक्ति से नतमस्तक होकर मेरी स्तुति करेंगे।

भावार्थ

गीता प्रेस यहाँ "भक्षयिष्यामि" (भक्षण करूँगी) के स्थान पर "क्षययिष्यामि" (अथवा "क्षपयिष्यामि"), अर्थात् नष्ट करूँगी, पाठान्तर बताता है।