Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 43

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

पुनरप्यतिरौद्रेण रूपेण पृथिवीतले । अवतीर्य हनिष्यामि वैप्रचित्तांस्तु दानवान् ॥ ४३ ॥

punarapyatiraudreṇa rūpeṇa pṛithivītale avatīrya haniṣhyāmi vaiprachittāṁstu dānavān

हिंदी अर्थ

फिर अत्यंत भयंकर रूप से पृथ्वी पर अवतार लेकर मैं वैप्रचित्त नाम वाले दानवों का वध करूँगी।

भावार्थ

दूसरा अवतार।