Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 44

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

भक्षयन्त्याश्च तानुग्रान् वैप्रचित्तान्महासुरान् । रक्ता दन्ता भविष्यन्ति दाडिमीकुसुमोपमाः ॥ ४४ ॥

bhakṣhayantyāśhcha tānugrān vaiprachittānmahāsurān raktā dantā bhaviṣhyanti dāḍimīkusumopamāḥ

हिंदी अर्थ

उन भयंकर वैप्रचित्त महादैत्यों का भक्षण करते समय मेरे दाँत अनार के फूल की भाँति लाल हो जाएँगे।

भावार्थ

वह चित्र जिससे अगले श्लोक में उनका नाम पड़ता है।