Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 41

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

वैवस्वतेऽन्तरे प्राप्ते अष्टाविंशतिमे युगे । शुम्भो निशुम्भश्चैवान्यावुत्पत्स्येते महासुरौ ॥ ४१ ॥

vaivasvate’ntare prāpte aṣhṭāviṁśhatime yuge śhumbho niśhumbhaśhchaivānyāvutpatsyete mahāsurau

हिंदी अर्थ

"वैवस्वत मन्वन्तर के अट्ठाईसवें युग में शुम्भ और निशुम्भ नाम के दो दूसरे महादैत्य उत्पन्न होंगे।

भावार्थ

देवी का उत्तर उनके भावी अवतारों की भविष्यवाणी है (श्लोक 41 से 55), हर एक का अपना नाम। पहला कृष्ण-कथा की याद दिलाता है।