Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 11, श्लोक 16

देव्याः स्तुति (नारायणी स्तुति)

शङ्खचक्रगदाशार्ङ्गगृहीतपरमायुधे । प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते ॥ १६ ॥

śhaṅkhachakragadāśhārṅgagṛihītaparamāyudhe prasīda vaiṣhṇavīrūpe nārāyaṇi namo’stu te

हिंदी अर्थ

शंख, चक्र, गदा और शार्ङ्ग धनुष रूपी उत्तम आयुध धारण करने वाली वैष्णवी रूपा नारायणि! प्रसन्न होओ, तुम्हें नमस्कार है।

भावार्थ

वैष्णवी, विष्णु की शक्ति, उनके चारों आयुधों के साथ।