Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 10, श्लोक 3

शुम्भवध

बलावलेपाद्दुष्टे त्वं मा दुर्गे गर्वमावह । अन्यासां बलमाश्रित्य युद्ध्यसे यातिमानिनी ॥ ३ ॥

balāvalepādduṣhṭe tvaṁ mā durge garvamāvaha anyāsāṁ balamāśhritya yuddhyase yātimāninī

हिंदी अर्थ

"दुष्ट दुर्गे! बल के घमंड में आकर गर्व मत दिखा। तू बड़ी मानिनी बनी है, पर दूसरी स्त्रियों के बल का सहारा लेकर लड़ती है।"

भावार्थ

शुम्भ का ताना: तुम अपने बल पर शक्तिशाली नहीं; तुम दूसरों पर निर्भर हो। देवी का उत्तर पूरी सप्तशती के सबसे महत्वपूर्ण श्लोकों में से एक है। गीता प्रेस यहाँ "पदु॰" पाठान्तर बताता है।