त्वमेव सन्ध्या सावित्री त्वं देवि जननी परा । त्वयैतद्धार्यते विश्वं त्वयैतत्सृज्यते जगत् ॥ ७५ ॥
tvameva sandhyā sāvitrī tvaṁ devi jananī parā tvayaitaddhāryate viśhvaṁ tvayaitatsṛijyate jagat
हिंदी अर्थ
हे देवि! तुम्हीं संध्या, तुम्हीं सावित्री और तुम्हीं परम जननी हो। तुम्हीं से यह विश्व धारण किया जाता है, तुम्हीं से यह जगत रचा जाता है,
भावार्थ
संध्या और सावित्री प्रातः-सायं की दैनिक उपासना और गायत्री मंत्र हैं। देवी हर ब्राह्मण के दैनिक साधनों की शक्ति हैं। गीता प्रेस यहाँ "सा त्वं" पाठान्तर बताता है।
