सुधा त्वमक्षरे नित्ये त्रिधा मात्रात्मिका स्थिता । अर्धमात्रास्थिता नित्या यानुच्चार्या विशेषतः ॥ ७४ ॥
sudhā tvamakṣhare nitye tridhā mātrātmikā sthitā ardhamātrāsthitā nityā yānuchchāryā viśheṣhataḥ
हिंदी अर्थ
तुम्हीं सुधा हो; नित्य अक्षर (प्रणव) में तुम तीन मात्राओं के रूप में स्थित हो, और वह नित्य अर्धमात्रा भी तुम्हीं हो जिसका विशेष उच्चारण नहीं किया जा सकता।
भावार्थ
ॐ की तीन मात्राएँ हैं, अ, उ और म, और उसके बाद आने वाली मौन "अर्धमात्रा"। ब्रह्मा देवी को इन सबमें, और विशेषकर ध्वनि से परे उस मौन में, स्थित बताते हैं।
