दृष्ट्वा तावसुरौ चोग्रौ प्रसुप्तं च जनार्दनम् । तुष्टाव योगनिद्रां तामेकाग्रहृदयस्थितः ॥ ६९ ॥
dṛiṣhṭvā tāvasurau chograu prasuptaṁ cha janārdanam tuṣhṭāva yoganidrāṁ tāmekāgrahṛidayasthitaḥ
हिंदी अर्थ
उन दोनों भयंकर असुरों को और सोए हुए जनार्दन को देखकर, एकाग्र हृदय से उन योगनिद्रा की स्तुति की,
भावार्थ
ब्रह्मा स्वयं विष्णु को नहीं जगा सकते, इसलिए वे उस शक्ति की प्रार्थना करते हैं जिसने विष्णु को निद्रा में धारण कर रखा है। देवी देवताओं के अपने कर्मों से भी महान हैं।
