विषयश्च महाभाग याति चैवं पृथक् पृथक् । दिवान्धाः प्राणिनः केचिद्रात्रावन्धास्तथापरे ॥ ४८ ॥
viṣhayaśhcha mahābhāga yāti chaivaṁ pṛithak pṛithak divāndhāḥ prāṇinaḥ kechidrātrāvandhāstathāpare
हिंदी अर्थ
और विषय भी सबके लिए अलग-अलग होते हैं। कुछ प्राणी दिन में नहीं देखते, कुछ रात में नहीं देखते,
भावार्थ
उल्लू रात में देखते हैं, अन्य प्राणी दिन में। हर कोई अपने सीमित ढंग से देखता है। गीता प्रेस यहाँ पाठान्तर बताता है ("याश्च", "यान्ति")।
