Bhakti Arohan
भक्ति से उन्नति की ओर
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दुर्गा सप्तशती
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अध्याय 1.35
दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 35
मधुकैटभवध
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मार्कण्डेय उवाच ॥ ३५ ॥
mārkaṇḍeya uvācha
हिंदी अर्थ
मार्कण्डेय जी बोले: