Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 1, श्लोक 36

मधुकैटभवध

ततस्तौ सहितौ विप्र तं मुनिं समुपस्थितौ ॥ ३६ ॥

tatastau sahitau vipra taṁ muniṁ samupasthitau

हिंदी अर्थ

हे ब्रह्मन्! तब वे दोनों साथ-साथ उन मुनि के पास पहुँचे,

भावार्थ

मार्कण्डेय अपने श्रोता को "विप्र" (ब्राह्मण) कहकर संबोधित करते हैं। सुरथ और समाधि की कथा किसी और को सुनाई जा रही कथा है, यह याद दिलाने के लिए कि यह ग्रंथ परंपरा से चली आई शिक्षा है।