Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 9, श्लोक 18

निशुम्भवध

स रथस्थस्तथात्युच्चैर्गृहीतपरमायुधैः । भुजैरष्टाभिरतुलैर्व्याप्याशेषं बभौ नभः ॥ १८ ॥

sa rathasthastathātyuchchairgṛihītaparamāyudhaiḥ bhujairaṣhṭābhiratulairvyāpyāśheṣhaṁ babhau nabhaḥ

हिंदी अर्थ

रथ पर बैठे-बैठे उत्तम आयुधों से युक्त अपनी आठ अनुपम भुजाओं से वह सारे आकाश को ढककर शोभा पाने लगा।

भावार्थ

शुम्भ भी एक विशाल, अनेक भुजाओं वाला रूप धारण करता है, मानो देवी से होड़ करने के लिए।