Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 48

रक्तबीजवध

वैष्णवीचक्रभिन्नस्य रुधिरस्रावसम्भवैः । सहस्रशो जगद्व्याप्तं तत्प्रमाणैर्महासुरैः ॥ ४८ ॥

vaiṣhṇavīchakrabhinnasya rudhirasrāvasambhavaiḥ sahasraśho jagadvyāptaṁ tatpramāṇairmahāsuraiḥ

हिंदी अर्थ

वैष्णवी के चक्र से घायल होने पर बहे रक्त से उत्पन्न हज़ारों उसी के समान महादैत्यों से सारा जगत व्याप्त हो गया।

भावार्थ

सारा जगत रक्तबीज की प्रतियों से भर रहा है।