Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 41

रक्तबीजवध

रक्तबिन्दुर्यदा भूमौ पतत्यस्य शरीरतः । समुत्पतति मेदिन्यां तत्प्रमाणस्तदासुरः ॥ ४१ ॥

raktabinduryadā bhūmau patatyasya śharīrataḥ samutpatati medinyāṁ tatpramāṇastadāsuraḥ

हिंदी अर्थ

जब भी उसके शरीर से रक्त की बूँद पृथ्वी पर गिरती, उसी के समान आकार का एक असुर पृथ्वी से उत्पन्न हो जाता।

भावार्थ

यह रक्तबीज की प्रसिद्ध शक्ति है। उसे प्रायः कामनाओं या नकारात्मक प्रवृत्तियों के प्रतीक के रूप में पढ़ा जाता है: हर बार जब आप एक पर प्रहार करते हैं, वह अनेक हो जाती है। गीता प्रेस यहाँ एक पाठान्तर बताता है।