Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 8, श्लोक 3

रक्तबीजवध

ततः कोपपराधीनचेताः शुम्भः प्रतापवान् । उद्योगं सर्वसैन्यानां दैत्यानामादिदेश ह ॥ ३ ॥

tataḥ kopaparādhīnachetāḥ śhumbhaḥ pratāpavān udyogaṁ sarvasainyānāṁ daityānāmādideśha ha

हिंदी अर्थ

प्रतापी शुम्भ ने, जिसका चित्त क्रोध के अधीन हो गया था, दैत्यों की सब सेनाओं को युद्ध के लिए कूच करने की आज्ञा दी।

भावार्थ

"कोपपराधीनचेताः" (जिसका चित्त क्रोध के अधीन था): शुम्भ स्वयं पर नियंत्रण खो चुका है। उसकी पराजयें केवल उसके क्रोध को बढ़ाती हैं।