Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 7, श्लोक 8

चण्डमुण्डवध

अतिविस्तारवदना जिह्वाललनभीषणा । निमग्नारक्तनयना नादापूरितदिङ्मुखा ॥ ८ ॥

ativistāravadanā jihvālalanabhīṣhaṇā nimagnāraktanayanā nādāpūritadiṅmukhā

हिंदी अर्थ

बहुत विशाल मुख, लपलपाती जीभ से भयानक, भीतर धँसी हुई और लाल आँखों वाली, अपनी गर्जना से दिशाओं को भरती हुई।

भावार्थ

लपलपाती जीभ, जो काली के चित्रों से परिचित है, पहली बार यहीं आती है।