तैर्मुक्तानि च शस्त्राणि महास्त्राणि तथासुरैः । मुखेन जग्राह रुषा दशनैर्मथितान्यपि ॥ १३ ॥
tairmuktāni cha śhastrāṇi mahāstrāṇi tathāsuraiḥ mukhena jagrāha ruṣhā daśhanairmathitānyapi
हिंदी अर्थ
असुरों द्वारा छोड़े गए बड़े-बड़े अस्त्र-शस्त्र वे रोष से मुँह में पकड़ लेतीं और दाँतों से पीस डालती थीं।
भावार्थ
उनके शस्त्र उनका भोजन बन जाते हैं। उन पर फेंकी गई कोई भी वस्तु उन्हें हानि नहीं पहुँचा सकती।
