पुरा शुम्भनिशुम्भाभ्यामसुराभ्यां शचीपतेः । त्रैलोक्यं यज्ञभागाश्च हृता मदबलाश्रयात् ॥ २ ॥
purā śhumbhaniśhumbhābhyāmasurābhyāṁ śhachīpateḥ trailokyaṁ yajñabhāgāśhcha hṛitā madabalāśhrayāt
हिंदी अर्थ
पूर्वकाल में शुम्भ और निशुम्भ नाम के असुरों ने अपने बल के घमंड में आकर शचीपति इन्द्र से तीनों लोक और यज्ञभाग छीन लिए।
भावार्थ
अध्याय 5 तीसरा और सबसे लंबा चरित्र (उत्तम चरित्र, अध्याय 5–13) आरंभ करता है, जिसकी अधिष्ठात्री महासरस्वती हैं। नए शत्रु भाई शुम्भ और निशुम्भ हैं।
