Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 5, श्लोक 13

देव्या दूतसंवाद

अतिसौम्यातिरौद्रायै नतास्तस्यै नमो नमः । नमो जगत्प्रतिष्ठायै देव्यै कृत्यै नमो नमः ॥ १३ ॥

atisaumyātiraudrāyai natāstasyai namo namaḥ namo jagatpratiṣhṭhāyai devyai kṛityai namo namaḥ

हिंदी अर्थ

अत्यंत सौम्य और अत्यंत रौद्र रूपा देवी को हम नमस्कार करते हैं; उन्हें बार-बार प्रणाम। जगत की आधारभूता कृति देवी को बार-बार नमस्कार।

भावार्थ

"अतिसौम्य अतिरौद्र" (अत्यंत सौम्य, अत्यंत रौद्र): दोनों छोर उनमें मिलते हैं। प्रसिद्ध "या देवी" भाग अब शुरू होता है।