Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 4, श्लोक 4

शक्रादिस्तुति

यस्याः प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च न हि वक्तुमलं बलं च । सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु ॥ ४ ॥

yasyāḥ prabhāvamatulaṁ bhagavānananto brahmā haraśhcha na hi vaktumalaṁ balaṁ cha sā chaṇḍikākhilajagatparipālanāya nāśhāya chāśhubhabhayasya matiṁ karotu

हिंदी अर्थ

जिनके अतुलनीय प्रभाव और बल का वर्णन भगवान अनंत (शेषनाग), ब्रह्मा और हर (शिव) भी नहीं कर सकते, वे चण्डिका समस्त जगत की रक्षा और अशुभ भय के नाश का विचार करें।

भावार्थ

अनंत (हज़ार मुखों वाले शेषनाग, जो अनंत स्तुति के लिए प्रसिद्ध हैं), ब्रह्मा और शिव का नाम लिया गया है कि वे भी उनका वर्णन नहीं कर सकते। यह 1.83–85 में ब्रह्मा की स्वीकृति की प्रतिध्वनि है कि कोई स्तुति पर्याप्त नहीं।

दुर्गा सप्तशती अध्याय 4.4 (शक्रादिस्तुति) | Bhakti Arohan