Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 3, श्लोक 40

महिषासुरवध

एवमुक्त्वा समुत्पत्य साऽऽरूढा तं महासुरम् । पादेनाक्रम्य कण्ठे च शूलेनैनमताडयत् ॥ ४० ॥

evamuktvā samutpatya sā’’rūḍhā taṁ mahāsuram pādenākramya kaṇṭhe cha śhūlenainamatāḍayat

हिंदी अर्थ

यह कहकर वे उछलीं और उस महादैत्य पर चढ़ गईं, अपने पैर से उसे दबाया, और शूल से उसके कंठ पर प्रहार किया।

भावार्थ

यही वह दृश्य है जो महिषासुरमर्दिनी की अनगिनत मूर्तियों में दिखाया जाता है: भैंसे पर एक पैर रखे, उसके कंठ में शूल लिए देवी।