Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 65

महिषासुरसैन्यवध

पातितै रथनागाश्वैरसुरैश्च वसुन्धरा । अगम्या साभवत्तत्र यत्राभूत्स महारणः ॥ ६५ ॥

pātitai rathanāgāśhvairasuraiśhcha vasundharā agamyā sābhavattatra yatrābhūtsa mahāraṇaḥ

हिंदी अर्थ

गिरे हुए रथों, हाथियों, घोड़ों और असुरों से वह भूमि, जहाँ वह महायुद्ध हुआ था, चलने योग्य न रही।

भावार्थ

युद्धभूमि स्वयं अगम्य हो जाती है, विजय के पैमाने का माप।