Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 2, श्लोक 55

महिषासुरसैन्यवध

मृदङ्गांश्च तथैवान्ये तस्मिन् युद्धमहोत्सवे । ततो देवी त्रिशूलेन गदया शक्तिवृष्टिभिः ॥ ५५ ॥

mṛidaṅgāṁśhcha tathaivānye tasmin yuddhamahotsave tato devī triśhūlena gadayā śhaktivṛiṣhṭibhiḥ

हिंदी अर्थ

और कुछ उस युद्ध-महोत्सव में मृदंग बजाने लगे। तब देवी ने त्रिशूल, गदा और शक्ति की वर्षा से,

भावार्थ

"युद्धमहोत्सव" (युद्ध का महान उत्सव): देवी के पक्ष से यह युद्ध एक उत्सव है। गीता प्रेस यहाँ "शरवृष्टिभिः" (बाणों की वर्षा) पाठान्तर बताता है।