समस्तरोमकूपेषु निजरश्मीन् दिवाकरः । कालश्च दत्तवान् खड्गं तस्याश्चर्म च निर्मलम् ॥ २४ ॥
samastaromakūpeṣhu nijaraśhmīn divākaraḥ kālaśhcha dattavān khaḍgaṁ tasyāśhcharma cha nirmalam
हिंदी अर्थ
सूर्य ने उनके सारे रोमकूपों में अपनी किरणें भर दीं, और काल ने उन्हें खड्ग और निर्मल ढाल दी।
भावार्थ
उनकी त्वचा स्वयं सूर्य के प्रकाश से चमकती है। स्वयं काल उन्हें खड्ग देता है, जो कालरात्रि के लिए उचित है। गीता प्रेस यहाँ "तस्यै चर्म" पाठान्तर बताता है।
