Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 13, श्लोक 7

सुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

इति तस्य वचः श्रुत्वा सुरथः स नराधिपः ॥ ७ ॥

iti tasya vachaḥ śhrutvā surathaḥ sa narādhipaḥ

हिंदी अर्थ

मेधा मुनि के ये वचन सुनकर राजा सुरथ ने,

भावार्थ

पूरे ग्रंथ के वक्ता मार्कण्डेय अपने शिष्य क्रौष्टुकि से फिर बोलते हैं। श्लोक 7–9 एक ही वाक्य हैं।