Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 13, श्लोक 5

सुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

आराधिता सैव नृणां भोगस्वर्गापवर्गदा ॥ ५ ॥

ārādhitā saiva nṛiṇāṁ bhogasvargāpavargadā

हिंदी अर्थ

आराधना करने पर वे ही मनुष्यों को भोग, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करती हैं।"

भावार्थ

भोग, स्वर्ग और अपवर्ग (मोक्ष): तीन प्रकार के फल। एक अर्धश्लोक से ऋषि की शिक्षा समाप्त होती है।