Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 13, श्लोक 3

सुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

विद्या तथैव क्रियते भगवद्विष्णुमायया । तया त्वमेष वैश्यश्च तथैवान्ये विवेकिनः ॥ ३ ॥

vidyā tathaiva kriyate bhagavadviṣhṇumāyayā tayā tvameṣha vaiśhyaśhcha tathaivānye vivekinaḥ

हिंदी अर्थ

वे ही विद्या (ज्ञान) उत्पन्न करती हैं। भगवान विष्णु की माया रूपी उन भगवती के द्वारा ही तुम, ये वैश्य और दूसरे विवेकी जन

भावार्थ

श्लोक 3–4 एक ही वाक्य हैं। ऋषि अध्याय 1 के अपने पहले उत्तर पर लौटते हैं: जो माया ज्ञानियों को मोहित करती है, वही ज्ञान का स्रोत भी है।