इति दत्त्वा तयोर्देवी यथाभिलषितं वरम् ॥ २७ ॥
iti dattvā tayordevī yathābhilaṣhitaṁ varam
हिंदी अर्थ
इस प्रकार उन दोनों को मनोवांछित वरदान देकर,
भावार्थ
मार्कण्डेय समापन करते हैं। श्लोक 27–29 पूरे ग्रंथ का समापन हैं।
सुरथवैश्ययोर्वरप्रदान
इति दत्त्वा तयोर्देवी यथाभिलषितं वरम् ॥ २७ ॥
iti dattvā tayordevī yathābhilaṣhitaṁ varam
इस प्रकार उन दोनों को मनोवांछित वरदान देकर,
मार्कण्डेय समापन करते हैं। श्लोक 27–29 पूरे ग्रंथ का समापन हैं।