ततो वव्रे नृपो राज्यमविभ्रंश्यन्यजन्मनि । अत्रैव च निजं राज्यं हतशत्रुबलं बलात् ॥ १७ ॥
tato vavre nṛipo rājyamavibhraṁśhyanyajanmani atraiva cha nijaṁ rājyaṁ hataśhatrubalaṁ balāt
हिंदी अर्थ
तब राजा ने दूसरे जन्म में नष्ट न होने वाला राज्य माँगा, और इस जन्म में भी शत्रुओं की सेना को बलपूर्वक नष्ट करके अपना राज्य फिर से पाने का वरदान माँगा।
भावार्थ
सुरथ सांसारिक वस्तुएँ माँगते हैं: अभी अपना राज्य, और अगले जन्म में अटल राज्य।
