Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 13, श्लोक 17

सुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

ततो वव्रे नृपो राज्यमविभ्रंश्यन्यजन्मनि । अत्रैव च निजं राज्यं हतशत्रुबलं बलात् ॥ १७ ॥

tato vavre nṛipo rājyamavibhraṁśhyanyajanmani atraiva cha nijaṁ rājyaṁ hataśhatrubalaṁ balāt

हिंदी अर्थ

तब राजा ने दूसरे जन्म में नष्ट न होने वाला राज्य माँगा, और इस जन्म में भी शत्रुओं की सेना को बलपूर्वक नष्ट करके अपना राज्य फिर से पाने का वरदान माँगा।

भावार्थ

सुरथ सांसारिक वस्तुएँ माँगते हैं: अभी अपना राज्य, और अगले जन्म में अटल राज्य।