Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 13, श्लोक 12

सुरथवैश्ययोर्वरप्रदान

ददतुस्तौ बलिं चैव निजगात्रासृगुक्षितम् । एवं समाराधयतोस्त्रिभिर्वर्षैर्यतात्मनोः ॥ १२ ॥

dadatustau baliṁ chaiva nijagātrāsṛigukṣhitam evaṁ samārādhayatostribhirvarṣhairyatātmanoḥ

हिंदी अर्थ

वे दोनों अपने शरीर के रक्त से प्रोक्षित बलि भी देते रहे। इस प्रकार संयमपूर्वक तीन वर्ष तक आराधना करते रहने पर,

भावार्थ

एक कठोर साधना, जो तीन वर्ष तक चली। श्लोक 12–13 एक ही वाक्य हैं।