स्तुता सम्पूजिता पुष्पैर्धूपगन्धादिभिस्तथा । ददाति वित्तं पुत्रांश्च मतिं धर्मे गतिं शुभाम् ॥ ४१ ॥
stutā sampūjitā puṣhpairdhūpagandhādibhistathā dadāti vittaṁ putrāṁśhcha matiṁ dharme gatiṁ śhubhām
हिंदी अर्थ
पुष्प, धूप और गंध आदि से पूजन करके उनकी स्तुति करने पर वे धन, पुत्र, धर्म में बुद्धि और उत्तम गति प्रदान करती हैं।
भावार्थ
अध्याय व्यावहारिक बात पर लौटकर समाप्त होता है: उनकी पूजा करो, वे सांसारिक सुख और उत्तम गति, दोनों देती हैं। गीता प्रेस यहाँ "तथा" पाठान्तर बताता है।
