Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 33

फलस्तुति

पश्यतामेव देवानां तत्रैवान्तरधीयत । तेऽपि देवा निरातङ्काः स्वाधिकारान् यथा पुरा ॥ ३३ ॥

paśhyatāmeva devānāṁ tatraivāntaradhīyata te’pi devā nirātaṅkāḥ svādhikārān yathā purā

हिंदी अर्थ

देवताओं के देखते-देखते वहीं अन्तर्धान हो गईं। फिर वे सब देवता भी निर्भय होकर पहले की भाँति

भावार्थ

गीता प्रेस यहाँ "तां सर्वदेवा॰" पाठान्तर बताता है।