Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 22

फलस्तुति

प्रीतिर्मे क्रियते सास्मिन् सकृत्सुचरिते श्रुते । श्रुतं हरति पापानि तथाऽऽरोग्यं प्रयच्छति ॥ २२ ॥

prītirme kriyate sāsmin sakṛitsucharite śhrute śhrutaṁ harati pāpāni tathā’’rogyaṁ prayachchhati

हिंदी अर्थ

जितनी प्रसन्नता मुझे होती है, उतनी इस उत्तम चरित्र को एक बार सुनने मात्र से हो जाती है। सुना हुआ यह चरित्र पापों को हर लेता है और आरोग्य देता है।

भावार्थ

"सकृत्", एक बार: एक बार का श्रवण एक वर्ष की पूजा के बराबर। बात यह नहीं कि कर्मकांड व्यर्थ है, बल्कि यह कि सच्चे मन से सुनना ही पर्याप्त है।