Bhakti Arohan
ॐ

दुर्गा सप्तशती — अध्याय 12, श्लोक 20

फलस्तुति

सर्वं ममैतन्माहात्म्यं मम सन्निधिकारकम् । पशुपुष्पार्घ्यधूपैश्च गन्धदीपैस्तथोत्तमैः ॥ २० ॥

sarvaṁ mamaitanmāhātmyaṁ mama sannidhikārakam paśhupuṣhpārghyadhūpaiśhcha gandhadīpaistathottamaiḥ

हिंदी अर्थ

मेरा यह सब माहात्म्य मेरा सान्निध्य प्राप्त कराने वाला है। पशु, पुष्प, अर्घ्य, धूप, गंध और उत्तम दीपों से,

भावार्थ

श्लोक 20–22 एक लंबा वाक्य हैं, जो एक वर्ष की विस्तृत पूजा की तुलना ग्रंथ के एक बार के श्रवण से करते हैं।